शाहबाद- डुमराँव। स्थानीय नगर परिषद क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था वर्तमान में गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। शहर की साफ-सफाई का जिम्मा संभालने वाली एनजीओ (एजेंसी) को पिछले दिसंबर माह से अब तक भुगतान नहीं मिल सका है। बकाया राशि करोड़ों में पहुंचने के कारण एजेंसी के लिए कार्य जारी रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था किसी भी समय ठप होने की आशंका गहरा गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर परिषद द्वारा सफाई कार्य के एवज में संबंधित एजेंसी को प्रति माह लगभग 90 लाख रुपये का भुगतान किया जाना निर्धारित है। पिछले चार महीनों से राशि न मिलने के कारण यह आंकड़ा काफी बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने अब तक अपने स्तर से आंशिक निवेश कर और त्योहारों के दौरान सफाई कर्मियों को कुछ राशि देकर काम चालू रखा है, लेकिन अब संसाधनों की कमी के चलते स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।
इस संबंध में नगर परिषद के स्वच्छता पदाधिकारी राजीव रंजन ने बताया कि दिसंबर माह से एजेंसी का भुगतान लंबित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 15वें वित्त आयोग से प्राप्त होने वाली अनुदान राशि अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त, स्टांप ड्यूटी मद के लगभग 3 करोड़ रुपये भी जिला प्रशासन के पास लंबित पड़े हैं। बजट के अभाव में न केवल सफाई, बल्कि परिषद के कई अन्य विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि परिषद क्षेत्र के सभी 35 वार्डों की नियमित सफाई की जिम्मेदारी इसी एजेंसी पर है। यदि शीघ्र ही बकाया मानदेय और खर्चों का निपटारा नहीं किया गया, तो शहर में कचरे का अंबार लग सकता है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर पड़ेगा। फिलहाल एजेंसी के प्रतिनिधि भुगतान की आस में कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।













