सिमरी (बक्सर)। बिहार के बक्सर जिले अंतर्गत सिमरी प्रखंड में गंगा नदी के कटाव ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। पिछले कुछ वर्षों के भीतर गंगा की तेज धारा ने न केवल सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि को अपने आगोश में ले लिया है, बल्कि अब कई गांव अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कभी मुख्य धारा से कई किलोमीटर दूर बसे केशोपुर, फूलीमिश्रा के डेरा और साठ के डेरा जैसे गांव अब नदी के बिल्कुल मुहाने पर आ चुके हैं।
कटाव की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ‘बीस के डेरा’ गांव का नामोनिशान अब केवल यादों में शेष रह गया है। देखते ही देखते पूरा गांव और ग्रामीणों के आशियाने गंगा में विलीन हो गए। वर्तमान स्थिति यह है कि साठ के डेरा गांव पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार की पहल पर कटाव रोकने के लिए कटावरोधी बांध का निर्माण कराया गया था, जिससे कुछ हद तक राहत मिली है। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि जहां से सुरक्षात्मक बोरियां पानी के तेज बहाव में बह गई हैं, वहां से कटाव फिर शुरू हो गया है। प्रशासन की ओर से बचाव कार्य जारी हैं, फिर भी प्रकृति के इस प्रकोप से ग्रामीण भयभीत हैं।
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