अहमदाबाद/नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के बड़े टूर्नामेंट्स में जब भी भारत और न्यूजीलैंड की टीमें आमने-सामने होती हैं, तो क्रिकेट प्रेमियों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। हाल के वर्षों में कीवी टीम टीम इंडिया के लिए एक ऐसी ‘दीवार’ बनकर उभरी है, जिसे ढहाना भारतीय दिग्गजों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। आंकड़ों और खेल के जानकारों के अनुसार, आईसीसी के नॉकआउट और फाइनल मुकाबलों में न्यूजीलैंड का पलड़ा अक्सर भारी रहा है।
दोनों टीमों के बीच फाइनल की सबसे बड़ी भिड़ंत साल 2021 में आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के दौरान देखी गई थी। साउथेम्प्टन में खेले गए उस ऐतिहासिक मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारतीय टीम को हराकर पहली बार टेस्ट का विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया था। इससे पहले, साल 2000 की आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी (अब चैंपियंस ट्रॉफी) के फाइनल में भी न्यूजीलैंड ने भारत को शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया था।
इतिहास पर नजर डालें तो केवल फाइनल ही नहीं, बल्कि सेमीफाइनल जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों पर भी कीवी टीम ने भारत की राह रोकी है। साल 2019 के वनडे विश्व कप का वह रोमांचक सेमीफाइनल आज भी प्रशंसकों के जेहन में ताजा है, जहां धोनी के रन-आउट के साथ ही भारत का विश्व कप जीतने का सपना टूट गया था। हालांकि, भारतीय टीम ने द्विपक्षीय सीरीज और लीग मैचों में कई बार न्यूजीलैंड को पटखनी दी है, लेकिन आईसीसी के खिताबी मुकाबलों और नॉकआउट के दबाव में न्यूजीलैंड की टीम मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाए हुए दिखती है। वर्तमान में दोनों टीमों के बीच होने वाली अगली भिड़ंत को लेकर क्रिकेट जगत में अभी से विश्लेषण का दौर शुरू हो गया है।













