डुमरांव (बक्सर)। भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक वर्षगांठ और 9 अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर रविवार को शहीद स्मारक समिति द्वारा एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान स्थानीय शहीद स्थल पर एकत्र होकर प्रबुद्ध नागरिकों एवं समिति के पदाधिकारियों ने वर्ष 1942 के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राण न्योछावर करने वाले डुमरांव के अमर बलिदानियों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इतिहास के उन पन्नों को याद दिलाते हुए कहा कि औपनिवेशिक शासन के विरोध में डुमरांव थाने पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साहसिक प्रयास में क्षेत्र के कई वीरों ने शहादत दी थी। समिति की ओर से जानकारी दी गई कि इस ऐतिहासिक संघर्ष में डुमरांव और आसपास के क्षेत्रों से कुल 17 सेनानियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया था।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने शहीदों के प्रति वर्तमान उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के दशकों बीत जाने के बाद भी इन बलिदानियों को वह यथोचित स्थान और सम्मान नहीं मिल सका है जिसके वे हकदार थे। कई बलिदानी वीरों के पैतृक गांवों में उनकी याद में अब तक कोई स्थायी स्मारक निर्मित नहीं हो सका है।
इसी क्रम में समिति ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के समक्ष प्रमुख मांगे रखीं, जिनमें अनुमंडल तथा जिला स्तर पर भव्य शहीद स्तंभों की स्थापना, नगर में एक सर्वसुविधायुक्त शहीद मेमोरियल हॉल का निर्माण और अमर शहीदों के परिजनों को 6 डिसमिल भूखंड के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देना शामिल है। इसके अलावा आश्रितों को वैध उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र निर्गत कर पेंशन योजना से जोड़ने की भी पुरजोर सिफारिश की गई।
संयोजक संजय चंद्रवंशी की अध्यक्षता और प्रवक्ता गोपाल प्रसाद गुप्ता के कुशल संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में चुनमुन प्रसाद वर्मा, मिंटू हाश्मी, नंद जी गांधी, संजय कुमार दास, संत कुमार गोंड, हरेंद्र शर्मा, मो. इम्तेयाज, मंगरू खरवार, राजू केसरी, कैलाश पटेल, बिहारी यादव तथा बाबू धन कुमार समेत कई स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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