डुमरांव नगर परिषद में पहली बार वोटिंग से होगा सशक्त स्थाई समिति का गठन, 3 सीटों के लिए दिग्गजों में लॉबिंग तेज

बक्सर जिले के डुमरांव नगर परिषद में सशक्त स्थाई समिति के गठन को लेकर स्थानीय राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। परिषद के इतिहास में पहली बार समिति के तीन खाली सदस्य पदों के लिए सीधे मतदान की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस नए घटनाक्रम के बाद से ही वार्ड पार्षदों के बीच बैठकों, समीकरणों और जोड़-तोड़ का दौर बेहद तेज हो गया है। हालांकि, कड़े प्रयासों और कई दौर की बातचीत के बाद भी अब तक इस मुद्दे पर किसी प्रकार की आम सहमति नहीं बन पाई है।

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राजनैतिक हलचल के बीच गुरुवार को स्थानीय सर्किट हाउस में पार्षदों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन घंटों चली इस चर्चा के बाद भी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल सका और बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई। इस गतिरोध के बाद अब यह पूरी तरह साफ माना जा रहा है कि चुनावी मैदान में एक दर्जन से अधिक प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाने के लिए उतर सकते हैं। कुल 35 वार्ड पार्षदों वाली इस नगर परिषद में आधे से ज्यादा पार्षद खुद को प्रबल दावेदार और संभावित उम्मीदवार के रूप में पेश कर रहे हैं।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, इस प्रतिष्ठित समिति में जगह बनाने के लिए पार्षद हर संभव दांव-पेच और चुनावी रणनीति अपनाने में जुटे हैं। बैठकों के दौर में कहीं सामाजिक समीकरणों को हवा दी जा रही है, तो कहीं इस स्थानीय चुनाव को मुख्य राजनीतिक दलों के नजरिए और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय गलियारों में दबे जुबान यह भी चर्चाएं तेज हैं कि कड़े मुकाबले को अपने पक्ष में करने के लिए कुछ स्तर पर पार्षदों का समर्थन हासिल करने के वास्ते हर तरह के हथकंडों का सहारा लिया जा रहा है।

नगर परिषद की राजनीति को करीब से देखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला साबित हो सकता है। इससे पहले तक परंपरा के अनुसार मुख्य पार्षद द्वारा ही समिति के सदस्यों का सीधे मनोनयन किया जाता था। गौरतलब है कि पूर्व मुख्य पार्षद सुनीता गुप्ता के पदमुक्त होने के बाद, उप मुख्य पार्षद विकास ठाकुर ने पुरानी समिति को भंग कर अपने समर्थक पार्षदों के नामों का प्रस्ताव आगे बढ़ाया था, लेकिन संबंधित विभाग ने उस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी नहीं दी। इस बीच विभाग द्वारा सीधे चुनाव कराने का निर्देश जारी कर दिया गया, जिसके बाद अब समिति के सदस्यों का भविष्य सीधे मतदान से तय होगा।

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