सिमरी (बक्सर): बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड अंतर्गत केशोपुर में स्थापित बहुग्रामीण पेयजलापूर्ति केंद्र अपनी उपयोगिता खोता नजर आ रहा है। जिस महत्वपूर्ण उद्देश्य के साथ इस विशाल परियोजना की नींव रखी गई थी, वह वर्तमान में प्रशासनिक उदासीनता और तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ चुकी है। आलम यह है कि इस केंद्र से जुड़े लगभग दो-तिहाई गांवों में पिछले कई महीनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है।
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, आशा पड़री, सिमरी, दवनपुरा, नगवां, घनंजयपुर, पैलाडीह और चांदपाली जैसे बड़े गांवों के हजारों परिवार इस समय बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। शुद्ध पेयजल का अभाव इस कदर है कि लोग मजबूरी में उन पुराने स्रोतों का रुख कर रहे हैं, जिनमें आर्सेनिक की मात्रा काफी अधिक पाई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे प्रदूषित जल का सेवन गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जलापूर्ति बाधित होने की सूचना कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक धरातल पर कोई सुधार नहीं दिखा। न तो खराब मशीनरी को दुरुस्त किया गया और न ही ग्रामीणों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। विभागीय सुस्ती और योजना की विफलता को लेकर अब जनता में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए मांग की है कि केशोपुर जलापूर्ति केंद्र को अविलंब सक्रिय कर शुद्ध जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र को संभावित स्वास्थ्य संकट से बचाया जा सके।
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